बुन्देली गीता
माँ शारदे को प्रणाम नमन वंदन करती हुई मैं गीता का बुन्देली बोली में पद्यानुवाद कर रही हूँ। गीता महाभारत का एक छोटा सा भाग है और सारे उपनिषदों का सार तत्व है। ये शास्त्रों का दोहन है। श्री कृष्ण जी द्वारा अर्जुन को दिया हुआ संदेश है, इससे अर्जुन को अपने वास्तविक स्वरूप का ज्ञान हुआ और उनका धर्मसंकट दूर हुआ। गीता के पाठकों को यह ध्यान रखकर गीता पढ़नी चाहिए कि भगवान कृष्ण सुदैव हमारी आत्मा में सूक्ष्म रूप से विद्यमान रहते हैं।
गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं। और इसका दूसरा नाम गीतोपनिषद भी है। गीता में कोई हिंसा को बढ़ावा नहीं दिया गया अपितु महाभारत में धर्म और अधर्म के बीच युद्ध है। यदि अपने संबंधियों के ऊपर अस्त्र शस्त्र चलाने को अर्जुन तैयार न होते तो इसका परिणाम भयंकर होता और देवी तथा आसुरी शक्तियों के बीच न्यायोचित कार्य न होता।
मेरा तो विचार है कि गीता को लाइफ मैनेजमेंट के रूप में विद्यालयों में भी पढ़ाया जाना चाहिए, यदि पूर्णतः गीता का ज्ञान लेकर गीता का भक्त जीवन निर्वाह करता है तो उसके जीवन में निराशा की कहीं भी जगह ना होगी।
गीता केवल भाव व अर्थ समझने का ग्रंथ नहीं है बल्कि उसके अनुसार दैनिक जीवन में आचरण करना ही सच्ची गीता का उपदेश और सार है। गीता के कृष्ण सम्पूर्ण ज्ञान हैं। और कर्म पर उनका विशेष उपदेश निहित है। निष्काम भाव से कर्म करना और फल की इच्छा ना करना यह गीता का मूल उद्देश्य और उपदेश है। गीता में जितने गहरे अंतस में जाकर डुबकी लगाते हैं। उतने ही नवीन सुन्दर अर्थ मिलते है।
मेरा अनुवाद भी ऐसी ही प्रस्तुति है। इस अनुवाद से हिन्दी भाषी विशेष रूप से बुन्देली भाषी गीता के अर्थ उद्देश्य को पूर्णत: समझ सकेंगे उनका आचरण गीता के गीतों से गीतमय हो सकेगा। ये अनुवाद तब अधिक आवश्यक हो गया जब शास्त्रीय ग्रंथों की संस्कृत पढ़ना समझना मुश्किल था उनके लिये अनुवाद के माध्यम से गीता बोधगम्य हो सके और गेयता से रुचि और मनोरंजन में वृद्धि हो सके। पर गीता के शब्द केवल इसलिए नहीं हैं कि हम उसका अर्थ समझ सकें अपितु उसके अनुरूप आचरण कर सकें।
गीता का पद्यानुवाद बुन्देली में और अर्थ हिन्दी में किया गया है। ताकि सर्व साधारण के लिए सुलभ और सुगम्य हो सकें। बुन्देली पद्यानुवाद का अर्थ मैंने मानक हिन्दी में लिखा है जिसकी भाषा बड़ी सरल और सटीक है। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि यह पाठकों को रुचिकर लगेगा और हमारे पाठकों को ये पुस्तक पर्याप्त अभिप्रेरणा और आनंद दे सकेंगी।
डॉ. रेणु श्रीवास्तव
(लेखिका)
Author Dr Renu Shrivastava
Publisher हरि ॐ शंखनाद
Published on Sep 4, 2025
Pages 141
Layout Fixed
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Available
Genres
Religion / Hinduism / General
Genres
Religion / Hinduism / Sacred Writings
हरि ॐ शंखनाद के साथ स्वरचित धार्मिक ग्रंथ / रचना / साहित्य प्रकाशित करें;
नाम- डॉ रेणु श्रीवास्तव (शिक्षिका)
पति- श्री सतगुरु दयाल खरे (शिक्षक) पुत्र- इंजी. अखिल खरे, पुत्र वधु- इंजी. मनु, पुत्र डॉ अर्पित राज खरे।
जन्म स्थान व स्थाई पता - जिला निवाडी म. प्र. | वर्तमान निवास - 03-कृष्णा कैम्पस, अशोका गार्डन हिनौतिया, 80 फिट रोड भोपाल (म.प्र.), दूरभाष- 8989098015, शिक्षा - M. A. B. Ed. Ph. D. विषय - (राम रास)
विशेष योग्यता - बुन्देली बोली, Youtube (Swarit hindi tutorials) पर विशेष हिन्दी व्याकरण की ऑनलाइन कक्षाएँ, विविध साहित्यिक समूहों पर live प्रस्तुतियाँ एवं कवि सम्मेलनोंमें काव्य पाठ में भाग, अंतरराष्ट्रीय काव्य मंच पर Facebook Live आदि।
साहित्यिक विधा- कविता, कहानी, दोहे, मुक्तक, हाइकू, लघुकथा बाल साहित्य, बुन्देली लेखन, लोकगीत, नारी जागृति पर विशेष लेखन कार्य।
प्रकाशित कार्य- ठाकुर नवलसिंह प्रधान कृत रामचंद्र विलास में रामरास, बुन्देली बायनो, बाल मनुहार, बुन्देली रामायण, पच्चीस पुस्तकों में साझा प्रकाशित रचनायें, पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन- अथाई की बातें, साहित्य वारिध, मीठी निबौरी, सर्जना, अर्ध सर्जना, सांझा बाल संकलन आदि में रचनाओं का प्रकाशन तथा आकाशवाणी से प्रसारण।
पुरस्कार और सम्मान - साहित्य सरगम सम्मान, उत्तम सृजन सम्मान, सर्व श्रेष्ठ सृजन सम्मान, शिक्षक सम्मान, सहभागिता सृजन सम्मान , मध्य प्रदेश काव्य श्री सम्मान, शब्द श्री सम्मान, राष्ट्रीय काव्य कला निधि सम्मान छत्तीसगढ़, दोहा श्री सम्मान मध्य प्रदेश गौरव सम्मान श्रेष्ठ सृजक सम्मान, बुन्देली रामायण श्रेष्ठ सर्जक सम्मान, राष्ट्र भाषा भूषण सम्मान 2022, रत्नावली सम्मान 2022 म प्र तुलसी साहित्य एकादमी की ओर से, हिन्द शिरोमणि सम्मान 2023, बसंत काव्य रत्न सम्मान 2023, महाकवि नीरज सम्मान 2023, काव्य रत्न सम्मान 2024, शब्द प्रतिभा बहु क्षेत्रीय फाउंडेशन नेपाल की ओर से, दिव्य नर्मदा अलंकरण सम्मान 2024, कृति सम्मान 2024 बाल साहित्य केंद्र एवं शोध संस्थान भोपाल, सरस्वती सम्मान 2024 विश्व हिन्दी रचनाकार मंच, राम महोत्सव रुद्राणी कला ग्राम ओरछा में शोधपत्र वाचन हेतु सम्मान 2025, रामायण केन्द्र भोपाल की ओर से शोध पत्र वाचन और सम्मान।
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